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BRICS समिट के बीच प्रगति मैदान के पास आठ से दस तिब्बती हिरासत में

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार सुबह प्रगति मैदान के पास एक सुरंग से आठ से दस तिब्बती नागरिकों को हिरासत में लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ये लोग कथित रूप से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में भाग लेने के लिए राजधानी पहुंचे चीनी प्रतिनिधिमंडल के विरोध में क्षेत्र में एकत्र हुए थे। सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में उनकी मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
सूत्रों ने बताया कि तिब्बती नागरिक प्रगति मैदान और भारत मंडपम के आसपास उस समय पहुंचे थे, जब ब्रिक्स सम्मेलन के कारण पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी थी। पुलिसकर्मियों ने संदिग्ध गतिविधि और लोगों के जमा होने की सूचना पर तत्काल कार्रवाई की। सभी लोगों को क्षेत्र से हटाकर पूछताछ के लिए नजदीकी पुलिस थाने अथवा निर्धारित स्थान पर ले जाया गया।
फिलहाल दिल्ली पुलिस की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक बयान जारी होने का इंतजार है। यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि हिरासत में लिए गए लोगों के पास बैनर, पोस्टर या विरोध प्रदर्शन से जुड़ी कोई अन्य सामग्री मौजूद थी या नहीं। उनके खिलाफ किसी कानूनी प्रावधान के तहत मामला दर्ज किया गया है अथवा पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया जाएगा, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है।
किसी व्यक्ति को एहतियातन हिरासत में लिया जाना औपचारिक गिरफ्तारी से अलग कानूनी स्थिति होती है। ऐसे मामलों में पुलिस सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने या संभावित विरोध को रोकने के लिए लोगों को कुछ समय के लिए अपने नियंत्रण में ले सकती है। हालांकि हिरासत में लिए गए लोगों को कानून के तहत निर्धारित अधिकार प्राप्त रहते हैं और आगे की कार्रवाई परिस्थितियों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाती है।
प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के कारण सुरक्षा के बहुस्तरीय इंतजाम किए गए हैं। सम्मेलन में चीन सहित विभिन्न सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष, सरकार प्रमुख और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। इस कारण आयोजन स्थल, प्रतिनिधियों के ठहरने वाले होटलों और उनके आवागमन वाले मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां और अर्धसैनिक बल भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हैं। आयोजन स्थल के आसपास बैरिकेडिंग, पहचान पत्रों की जांच और वाहनों की तलाशी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी करने के साथ संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सादे कपड़ों में कर्मियों को भी तैनात किया गया है।
ब्रिक्स सम्मेलन के लिए राजधानी में हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और कई मार्गों पर यातायात नियंत्रण की व्यवस्था की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, वीवीआईपी आवाजाही को ध्यान में रखते हुए भारत मंडपम और उससे जुड़े क्षेत्रों को उच्च सुरक्षा क्षेत्र में रखा गया है। अलग-अलग विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस अधिकारियों और इकाइयों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रगति मैदान के आसपास स्थित सुरंगों और भूमिगत मार्गों पर भी सुरक्षा एजेंसियों की विशेष नजर है। इन रास्तों का उपयोग सामान्य दिनों में यातायात को सुगम बनाने के लिए किया जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान किसी व्यक्ति या समूह का वहां अनधिकृत रूप से एकत्र होना सुरक्षा संबंधी चिंता पैदा कर सकता है। इसी कारण सूचना मिलते ही पुलिस ने लोगों को वहां से हटा दिया।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि हिरासत में लिए गए तिब्बती नागरिक चीनी प्रतिनिधिमंडल के विरोध की तैयारी कर रहे थे। हालांकि उनकी ओर से इस संबंध में कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। विरोध की योजना और उसके स्वरूप के बारे में पूछताछ के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस यह भी पता लगा सकती है कि वे लोग अकेले पहुंचे थे या किसी संगठन के आह्वान पर वहां जमा हुए थे।
चीन से जुड़े उच्चस्तरीय दौरों के दौरान राजधानी में तिब्बती समुदाय के कुछ संगठनों द्वारा पहले भी विरोध प्रदर्शन किए जाते रहे हैं। ये संगठन तिब्बत में मानवाधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषय उठाते हैं। ऐसे प्रदर्शनों के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां तिब्बती बस्तियों, संवेदनशील मार्गों और चीनी प्रतिनिधिमंडल से जुड़े कार्यक्रम स्थलों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतती हैं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में विरोध करने का अधिकार मौजूद है। इसके साथ ही संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान सुरक्षा, यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन निर्धारित क्षेत्र तथा अनुमति संबंधी शर्तें लागू कर सकता है। प्रतिबंधित या उच्च सुरक्षा क्षेत्र में बिना अनुमति प्रदर्शन करने की कोशिश पर पुलिस एहतियाती कदम उठा सकती है।
पुलिस अब हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान और उनके राजधानी पहुंचने के उद्देश्य का सत्यापन कर सकती है। उनके मोबाइल फोन, आपसी संपर्क और यात्रा से संबंधित जानकारी की जांच किए जाने की संभावना है, लेकिन ऐसी किसी जांच के संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस को यह भी स्पष्ट करना होगा कि हिरासत किस कानूनी आधार पर ली गई और आगे क्या कार्रवाई की जा रही है।
ब्रिक्स सम्मेलन के कारण दिल्ली में कई मार्गों पर यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन लागू किए गए हैं। प्रगति मैदान, मथुरा रोड और आसपास के क्षेत्रों में वीवीआईपी आवाजाही के समय वाहनों को वैकल्पिक रास्तों पर भेजा जा सकता है। नागरिकों को प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने और यातायात संबंधी आधिकारिक सूचना का पालन करने की सलाह दी गई है।
चीन के शीर्ष नेतृत्व और भारतीय नेतृत्व के बीच संभावित द्विपक्षीय संपर्क के कारण सुरक्षा व्यवस्था और अधिक संवेदनशील मानी जा रही है। चीन के विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों के नेताओं की बैठक की तैयारियों का उल्लेख किया है। दोनों पक्ष आपसी संबंधों, संवाद और मतभेदों के प्रबंधन से जुड़े विषयों पर संपर्क बनाए हुए हैं।
तिब्बती नागरिकों को हिरासत में लिए जाने के बाद आयोजन स्थल के आसपास निगरानी और कड़ी किए जाने की संभावना है। पुलिस किसी अन्य संभावित विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ा सकती है। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के आवागमन वाले मार्गों पर आम लोगों की आवाजाही भी कुछ समय के लिए नियंत्रित की जा सकती है।
फिलहाल घटना को लेकर जानकारी पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आई है। हिरासत में लिए गए लोगों की सही संख्या, उनके संगठनात्मक संबंध और आगे की कानूनी कार्रवाई की पुष्टि आधिकारिक बयान के बाद ही हो सकेगी। ब्रिक्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के बीच हुई इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच संतुलन के प्रश्न को फिर चर्चा में ला दिया है।





